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गौ सेवा

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

धर्मपथिक पूज्य गुरुवर श्री शैलेंद्र कृष्णजी का गौमाता के प्रति असीम प्रेम है । गौमाता की महिमा बताते हुए वे कहते हैं –

“गाय सदा पूजनीय है । गौ को त्यागमूर्ति कहा गया है, क्योंकि उसके सभी अंग-प्रत्यंग, उसका दूध, गोबर, मूत्र सब कुछ दूसरों के ही उपयोग में आते हैं । इस महागुण से गौ सर्वोत्तम माता कही गयी है । तृणों के आहार पर जीवन धारण कर गाय मानव के लिए अलौकिक अमृतमय दूध प्रदान करती है । शास्त्रों में गौ को सर्वदेवमयी और सर्वतीर्थमयी कहा गया है । इसलिए गौ के दर्शन से समस्त देवताओं के दर्शन और समस्त तीर्थों की यात्रा करने का पुण्य प्राप्त हो जाता है । गाय के दूध से जीवन मिलता है ।

गाय के दूध में वे सारे तत्त्व मौजूद हैं, जो जीवन के लिए जरूरी हैं । वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय के दूध में सारे पौष्टिक तत्त्व मौजूद होते हैं । रोज पंचगव्य (गाय के दूध, घी, दही, गौमूत्र, गोबर के मिश्रण बनता है) का सेवन करनेवाले पर तो जहर का भी असर नहीं होता और वह सभी व्याधियों से मुक्त रहता है । मीरा जहर पीकर जीवित बच गई, क्योंकि वे पंचगव्य का सेवन करती थीं । अपने लिए आलीशान बंगले बनानेवाले यदि अपनी कमाई का एक हिस्सा भी गौ सेवा और उसकी रक्षा के लिए अर्पित करें तो गौमाता के संरक्षण एवं संवर्धन से देश की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति मजबूत होगी ।

पूज्य गुरुवर नित्य गौ सेवा स्वयं भी करते हैं एवं अपने सभी भक्तों व शिष्यों को भी गौ सेवा के लिए प्रेरित करते हैं ।