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जीवदया अभियान

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

सभी जीवों का करें सम्मान, बचाएँ पशु-पक्षियों की जान

भारत भूमी में जो भी अवतार या संत हुए हैं, उन्होंने संसार के आगे हमेशा यही आदर्श रखा है कि, केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि प्राणिमात्र में परमात्मा का निवास है | सभी प्राणी उस परमात्मरूपी धागे में पिरोए हुए मोतियों के समान हैं, किसीका भी स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है | प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए हर प्राणी कुछ न कुछ योगदान देता ही है, जैसे बिल्ली चूहों को मारकर चूहों की वृद्धि संतुलित करती है | गाय के गोबर और मूत्र से पर्यावरण शुद्ध होता है | और तो और कोई भी प्राकृतिक आपदा आनेवाली होती है तो पहले पशु-पक्षियों को उसका संकेत मिल जाता है और उनके द्वारा मनुष्यों को भी संकेत मिल जाता हैं |

पूज्य गुरुवर कहते हैं कि “भगवान ने मनुष्य को अपनी भावनाएँ, पीड़ाएँ, संवेदनाएँ व्यक्त करने के लिए वाणी प्रदान की है | परंतु ये बेजुबान और निर्दोष प्राणी अपनी आवश्यकता हमें शब्दों में नहीं बता सकते | अतः जिस तरह हम अपनी भूक-प्यास को मिटाने के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं, उसी प्रकार इनके लिए उपयुक्त भोजन तथा पानी की व्यवस्था करके उनके पोषण और रक्षण करना हमारा दायित्व है |
नि:स्वार्थ और परोपकार की भावना से युक्त होकर, अपनी क्षमता के अनुसार पशु-पक्षियों के लिए भोजन-दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें | क्योंकि जिस क्षेत्र में पशु-पक्षियों की भूक-प्यास से मौत हो जाती है या जहाँ बड़े पैमाने पर उनका वध किया जाता है, वह पूरा क्षेत्र अभिशप्त हो जाता है | वहाँ प्राकृतिक आपदाएँ, अकाल मृत्यु और भय की स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं |”

मानवता से पशुता की ओर जानेवाले इस मानव समाज में मानवता का विकास करने के लिए धर्म पथिक पूज्य गुरुवर श्री शैलेंद्र कृष्णजी द्वारा जीवदया अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें महाराजजी बंदरों के लिए चने, कुत्तों के लिए बिस्किट, पक्षियों के लिए दाना-पानी आदि की व्यवस्था करने हेतु लोगों को प्रेरित करते हैं |