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स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

धर्मपथिक पूज्य गुरुवर श्री शैलेन्द्र कृष्णजी सेवा की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि – ‘नर सेवा ही नारायण सेवा है । यह सिर्फ कहनेवाली बात नहीं है । यदि इसे सही तरीके से जीवन में उतार लिया जाए, तो मनुष्य को आत्म तृप्ति का सुख प्राप्त हो जाता है । भजन, कीर्तन, सत्संग की अपनी महिमा है, लेकिन सेवा की महिमा सबसे बढ़कर है । दरअसल जीवरूप में शिव की सेवा ही सच्ची पूजा है । इसके बाद अलग से और कुछ भी करने की जरूरत नहीं रह जाती है । हर इंसान के रूप में परमात्मा साक्षात् हमारे सामने मौजूद हैं । इसलिए तन, मन व धन से, जो कुछ भी बन पाता है, बिना किसी स्वार्थ के सबको सुख पहुँचाने की चेष्टा करो । इसलिए इंसान को चाहिए कि वह भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए अपने बच्चों को संस्कारवान बनाए, जिससे धर्म और समाज का कल्याण हो सके ।’
इसी सिद्धांत को आधार बनाकर पूज्य गुरुवर दिनभर लोगों को भागवत कथा का रसपान कराते, भक्तों से मिलकर वार्तालाप करते और अपने दिनभर की व्यस्त दिनचर्या को पूर्ण कर, रात्री में १२-१ बजे जब सब सेवाकार्य से निवृत्त होते, तो जिस शहर में कथा का आयोजन होता, वहाँ के अस्पतालों में मरीजों का हालचाल जानने के लिए पहुँच जाते । अपनी आध्यात्मिक शक्ति अर्थात् मन्त्रों की शक्ति के द्वारा वे रोगियों को आरोग्यता प्रदान करते । रोगियों में फल वितरण करके वे उन्हें यथा संभव शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक सहयोग करने का प्रयास करते । पूज्य गुरुवर की निज संस्था श्री भागवद परिवार जनकल्याण सेवा समिति द्वारा गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई की व्यवस्था, निर्धन कन्याओं के विवाह की व्यवस्था आदि अनेक सेवाकार्य सुचारू रूप से चलाये जाते हैं ।